कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में हेमाटोलोजी के मरीजों की समस्या के सम्बंद में एक लेख खास तौर पे SGPGI के मरीजों के लिए !

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कोरोना वायरस से किस प्रकार की बीमारी होती है ?
यह एक प्रकार की वायरल बीमारी (संक्रमण) है जो बुखार / सुखी खांसी / साँस लेने में समस्या जैसे लक्षणों के साथ प्रकट होती है !
कोरोनावायरस कई प्रकार के वायरस का एक समूह है जो आम तौर पे स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है पर थोड़े बदलाव के साथ मनुष्यों में भी संक्रमण कर सकता है जो की यह नए कोरोना वायरस (COVID-19) के साथ हो रहा।

इस बीमारी के लक्षण क्या हैं ?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर 88 फीसदी को बुखार (तापमान 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (37.7 डिग्री सेल्सियस) या इससे ऊपर), 68 फीसदी को खांसी और कफ, 38 फीसदी को थकान, 18 फीसदी को सांस लेने में तकलीफ, 14 फीसदी को शरीर और सिर में दर्द, 11 फीसदी को ठंड लगना और 4 फीसदी में डायरिया के लक्षण दिखते हैं.
ध्यान रहे की इस बीमारी के लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते हैं पर रनिंग नोज यानी नाक बहना कोरोना वायरस का लक्षण नहीं माना जा रहा है जो की इस बीमारी को फ्लू से अलग करने में मदद करता है !

क्या यह बीमारी हमारे लिए ख़तरनाक है ?
हलाकि इस बीमारी में मृत्युदर कम है लेकिन कुछ आयु विशेष और वर्ग विशेष में इस बीमारी के गंभीर होने की दर काफी जायदा है जैसे की :-
१. अधिक आयु के लोग (>50 ईयर /साल )
२. जिनको ह्रदय रोग या फिर फेफड़े (स्वास से सम्बंधित) रोग हो
३. जिनकी रोग प्रतिरोधक छमता काम है (जैसे की कैंसर के मरीज जिनका कीमोथेरेपी चल रहा है, अप्लास्टिक एनीमिया के मरीज तौर बोन मेरो ट्रांसप्लांट के बाद के मरीज, जो मरीज स्टेरॉयड पे हैं)

इन लोगों और इनके परिवार के लोगों को इस बीमारी के संक्रमण से बचाओ करना बहुत ज्यादा जरुरी है !

हमारी OPD की तारीख है ! क्या हमे OPD आना चाहिए ?

नोट >> यदि आपको अस्पताल के तरफ से कोई फ़ोन नंबर उपलब्ध कराया गया है/या फिर इलाज करने वाले डॉक्टर का नंबर है तो उसपे संपर्क कर के पता कर लेना भी एक बेहतर उपाय है!

ऐसे मरीज जो स्वस्थ महसूस कर रहे हों / जिनको कोई समस्या नहीं है वो अपनी दवाइयां जारी रख सकते हैं जो पहले से चल रही है ! (ऐसे मरीजों की लिस्ट निचे दी गयी जिनको १-२ महीने तक OPD आने की जरुरत नै है )
१. आयरन/विटामिन बी १२/फोलेट की कमी वाली एनीमिया के मरीज !
२. आई टी पि (कम प्लेटलेट के मरीज ) जिनका प्लेटलेट 10000 से ज्यादा है और कोई ब्लीडिंग की समस्या नै है और अज़ोरान (AZORAN)/डैपसोन /रेवोलड नाम की दवाई खा रहे हैं !
३. आई टी पि (कम प्लेटलेट के मरीज ) जिनका प्लेटलेट 10000 से ज्यादा है और कोई ब्लीडिंग की समस्या नै है और ओमनाकोर्टिल कम डोज़ पे चल रहा है (जैसे की 10 mg से कम रोजाना)
४. हेमोलिटिक एनीमिया के मरीज (सिकेल सेल एनीमिया / हेरेडिटरी स्फेरॉयटॉसिस ) जिनका हीमोग्लोबिन 7 से ज्यादा है और कोई समस्या नै है !
५. थलसेमिया मेजर के मरीज जिनका हीमोग्लोबिन 9 से ज्यादा है और सभी थलसेमिया माइनर के मरीज !
६. थलसेमिया मेजर के मरीज जिनका हीमोग्लोबिन 9 से कम है और हर 21 दिन पे ब्लड चढाने की जरुरत पड़ती है – ऐसे मरीजों से निवेदन है की आस पास के अस्पताल में ही ब्लड चढ़वा लें !
७. कैंसर (लिंफोमा /मायलोमा /एक्यूट ल्य्म्फोब्लास्टिक लेकिमिया ) के वो मरीज जिनका इलाज पूरा हो गया है और वो केवल तिमाही /छमाही रूटीन फॉलो उप के लिए आ रहे हों और कोई समस्या नहीं हो !
८. पालीसीठेमीआ (ज्यादा लाल रक्त बनना/ हीमोग्लोबिन का ज्यादा होना ) के मरीज जिनका हीमोग्लोबिन 13 से 17 के बिच है (पुरुष ) और जिन महिला मरीजों का हीमोग्लोबिन 12 से 17 के बिच है!
9 . डी वी टी (DVT) के वो मरीज जो वार्फरिन / एसट्रोम ले रहे है और उनका पी टी (PT)/ आई एन आर (INR ) 2 -3 के बिच हो तो उसी दोज पे ये चलाते रहें!

मेरा कीमोथेरेपी का डेट है ? क्या मुझे OPD आना चाहिए ?
जिन मरीजों का केमोथेरपी का डेट है (जैसे की लिंफोमा के मरीज जिनको हर 21 या 28 दिन पे केमोथेरपी लगती हो ) उनको रिस्क लेते हुए OPD आना उचित है क्यूंकि इससे बीमारी के वापस आने की समस्या बढ़ जाएगी। ऐसे मरीज OPD अवस्य आएं परन्तु मास्क लगा के रखे और कम भीड़ भाड़ वाले इलाके में रहें और समय समय पर साबुन से हाथ धोते रहे और संभव हो तो सांइटिज़ेर का उपयोग करें और अनावश्यक रूप से हाँथ को चेहरे पर न ले जाएँ!

मैं ALL (एक्यूट ल्य्म्फोब्लास्टिक लेकिमिया) का मरीज हूँ और मेरा मेंटेनन्स चल रहा है ? क्या मेरा OPD आना आवश्यक है ?
यदि मरीज को कोई समस्या नै है और टीएलसी (TLC ) 2000 -4000 के बिच है और SGPT/SGOT 180 से कम है तो जो दवाई चल रही उसी को १ महीने के लिए चलाया जा सकता है ! PED अकाउंट वाले मरीज/ या फिर जिनकी दवाई ख़तम हो गयी हो वो वैसे मरीज के माता /पिता/रिस्तेदार आ के दवाई ले जा सकते है परन्तु मास्क लगा के रखे और कम भीड़ भाड़ वाले इलाके में रहें और समय समय पर साबुन से हाथ धोते रहे और संभव हो तो सांइटिज़ेर का उपयोग करें और अनावश्यक रूप से हाँथ को चेहरे पर न ले जाएँ, क्यूंकि आप संक्रमण अस्पताल से ले जा के अपने बच्चे को दे सकते हैं!
मरीज को अगर कोई समस्या है तो मरीज को OPD जरूर लाएं परन्तु ऊपर लिखे तौर पे सावधानी जरूर बरते !

नोट : केवल पोर्ट फ्लश कराने के लिए बच्चे को OPD लाने की आवश्यकता नहीं है ! इसमें 1 महीने का विलम्ब या देरी की जा सकती है !

मेरा बोन मेरो ट्रांसप्लांट हुआ है ? मेरे लिए क्या निर्देश है ?
आपके पास आपके डाक्टर का नंबर अवस्य रूप से होगा ! कृपया उनसे फ़ोन या व्हाटस एप्प पे संपर्क करें!

नोट : अन्य सभी मरीज जिनकी कीमोथेरेपी OPD बेसिस पे चल रही है और भर्ती करने की जरुरत नहीं पड़ती (जैसे की मायलोमा / क्रोनिक माइलॉयड लुकेमिआ / क्रोनिक लिम्फोसाईटिक लुकेमिआ )- अगर मरीज को कोई समस्या नहीं है तो अपने घर वालों को OPD भेज के दवाइयां मंगवा सकते हैं परन्तु मास्क लगा के रखे और कम भीड़ भाड़ वाले इलाके में रहें और समय समय पर साबुन से हाथ धोते रहे और संभव हो तो सांइटिज़ेर का उपयोग करें और अनावश्यक रूप से हाँथ को चेहरे पर न ले जाएँ, क्यूंकि आप संक्रमण अस्पताल से ले जा के अपने मरीज को दे सकते हैं जो उनके लिए घातक हो सकता है!

 

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए. अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है. खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें.

मेरा सवाल ऊपर के सवालों से अलग है ?

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3 thoughts on “कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में हेमाटोलोजी के मरीजों की समस्या के सम्बंद में एक लेख खास तौर पे SGPGI के मरीजों के लिए !”

  1. Sir , I appreciate your innovative thinking and support to all cancer patients.
    Thank you for taking this initiative in this critical situation . Your Message is beneficial for us.

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