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क्रोनिक माइलॉयड लुकेमिआ के मरीजों को लिए आवश्यक जानकारियां।

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सवाल: मुझे क्रोनिक माइलॉयड लुकेमिआ है – यह कितनी गंभीर समस्या है ?

क्रोनिक माइलॉयड लुकेमिआ यानि सी एम् एल एक प्रकार का ब्लड कैंसर है जिसके गंभीरता के तीन स्तर होते हैं।

सवाल: मुझे किस फेज की बीमारी है ?

ज्यादातर मरीजों की तरह आपको भी क्रोनिक फेज की बीमारी है – यानि पहले स्तर की बीमारी है।

सवाल: इसके इलाज के बारे में संछेप में कुछ बताएं ?

सुरुवात में टीएलसी काम करने के लिए आपको एक कैप्सूल दिया जायेगा और जैसे ही बीमारी जांचो द्वारा कन्फर्म हो जाएगी वैसे ही – इमेटिनिब या उसी प्रकार की कोई दवाई दी जाती है जिसको रेगुलर रूप से खाना पड़ता है। ये दवाइयाँ काफी कारगर होते हैं इस बीमारी में बशर्ते इसको रेगुलर लिया जाये बिना गैप किये। सुरुवात के 1 -2 महीने में हर महीने या 15 दिन पे आपको ओ.पी.डी में सी.बी.सी के साथ दिखाने को बोला जायेगा। यदि सब ठीक रह तो फिर हर 3 महीने में आपको ओ.पी.डी में दिखाने को बोला जायेगा – हर 3 महीने में सी.बी.सी के साथ साथ बी.सी.आर/ए.बी.एल की एक विशेष जाँच भी करनी होती है जिससे हमे बीमारी कितनी ठीक हुई है कितनी नहीं उसका पता चल जाता है।

सवाल: ये दवाई कितने दिन चलेगी ?

इस बात का ध्यान रखे की यह दवाई काफी लम्बे समय तक (अंदाज़े से कहें तो कम से कम 5 -10 साल) चलानी पड़ती है और कम से कम साइड इफेक्ट्स के साथ इसको लम्बे समय तक चलना भी संभव होता है।

सवाल: इन दवाइयों का कोई विशेष साइड इफेक्ट्स होता है ?

इमेटिनिब के साइड इफेक्ट्स जो आम तौर पे मरीजों को होता है वो इस प्रकार हैं

जिन साइड इफेक्ट्स का ध्यान रखना होता है वो है – टी.एल.सी और प्लेटलेट का कम होना और इस लिये समय समय पर ब्लड की जांच (सी.बी.सी) कर के इनके स्तर की देखना होता है और दवाई रोक के डॉक्टर को कब दिखाना है यह जानकारी आपके डॉक्टर आपको जरूर देंगे।

सवाल: क्या हम अपना नार्मल/ आम जीवन सही से बिता पाएंगे दवाईओं के चलने पे भी ?

इसका क्रोनिक फेज एक काफी धीमी गति का कैंसर है और यह दवाईयां काफी कारगर है. इनको लम्बे समय तक चलना पड़ता है परन्तु 80 -90 % मरीजों में इन दवाईयों से बीमारी कण्ट्रोल में रहती है और चुकी साइड इफेक्ट्स भी ज्यादा नहीं होते इसलिए लम्बे समय चलने के बावजूद भी मरीज अपना नॉर्मल जीवन यापन करते हैं और उनको कोई परेशानी नहीं होती।

सवाल: क्या ऐसा भी होता है की दवाई काम ही न करे ?

सुरुवात में ही 10 -15 % मरीजों में सुरुवात की दवाई से रिस्पांस नहीं आता – इस स्थिति में इसी ग्रुप की और अन्य दवाइयां दी जाती है जो की ज्यादातर मरीजों में कारगर होती है।
सुरुवाती दवाई से बीमारी कण्ट्रोल होने के बाद भी आगे चल के 10-15 % मरीजों में सुरुवाती दवाई काम करना बंद करना बंद कर देती है तब भी हमे इसी ग्रुप की और अन्य दवाइयां देनी पड़ती है जो की ज्यादातर मरीजों में कारगर होती है।

सवाल: क्या मेरी बीमारी दूसरे और तीसरे स्तर की बीमारी बन सकती है ?

हाँ अगर ये दवाईयां काम न करे या फिर आप सही से रेगुलर दवाई नहीं लेंगे तो आपकी बीमारी दूसरे स्तर की बीमारी (एक्सेलरेटेड फेज) और तीसरे स्तर की बीमारी (ब्लास्ट फेज) में परिवर्तित हो सकती है। इस स्थिति में फिर इन दवाईयों के काम नहीं बनता – तेज कीमोथेरपी की आवश्यकता पड़ती है।

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