मायलोमा के इलाज में कीमोथेरेपी और बोन मेरो ट्रांसप्लांट बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ !

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मुझे मायलोमा हुआ है, ऐसा बताया गया है, यह किस प्रकार की बीमारी है ?

मायलोमा एक प्रकार का कैंसर है जो प्लाज्मा सेल्स (बोन मेरो में मिलने वाला एक प्रकार का सफ़ेद खून ) के अत्यधिक बनने से होता है ! यानि की ये प्लाज्मा सेल्स का कैंसर है जो बोन मेरो (अस्थि मज्जा ) में होता है – ऐसे मरीज हड्डियों में दर्द (या फिर हड्डियों के फ्रैक्चर), किडनी फ़ैल या फिर एनीमिया के साथ अस्पताल में आते हैं !

क्या इस कैंसर का इलाज संभव है ?

इस कैंसर के इलाज के लिए अब बेहतरीन दवाइयां उपलब्ध है ! हालांकि यह समझने वाली बात है की इस कैंसर को जड़ से ख़तम करना मुश्किल है लेकिन अगर सही तरह से इलाज किया जाये तो इस कैंसर को लम्बे समय तक बहोत हद्द तक कण्ट्रोल कर के रखा जा सकता है – इससे मरीज नार्मल जीवन जीने में सफल रहता है ! इसीलिए इस रोग का इलाज करवाना जरुरी है और सही तरीके से इलाज करवाने से नार्मल तरीके से जीना भी संभव हो पाता है ! इसलिए निराश न हों और इलाज के लिए हर तरीके से प्रयास करें !

हमे पता चला है की इस बीमारी में बोन मेरो ट्रांसप्लांट भी जरुरी होता है। आपने हमे इसके बारे में कुछ नहीं बताया ?

मैं आपको इसके बारे में बताने ही वाला था की आपने पूछ दिया। बिलकुल सही जानकारी है आपके पास। पहले भी मैंने आपको बताया की इस कैंसर को जड़ से मिटाना संभव नहीं है परन्तु अगर ट्रांसप्लांट किया जाये तो बीमारी के लम्बे समय तक वापस आने की संभावना नहीं होती।
इस्को समझाने के लिए मैं आपको इसके इलाज की विधि बताता हूँ।
दो तरह से इसका इलाज किया जाता है –
१. केवल कीमोथेरेपी
२. कीमोथेरेपी के बाद बोन मेरो ट्रांसप्लांट

यदि मरीज के शारीरिक स्थिति ठीक होती है या फिर मरीज कम उम्र का होता है तो कुछ महीनो की कीमोथेरेपी के बाद बोन मेरो ट्रांसप्लांट कर देना सबसे बेहतर इलाज का तरीका है, हालाकि यह समझना जरुरी है की इसमें ज्यादा खर्च होता है और आपके पास उचित आर्थिक इंतज़ाम होना जरुरी है!

मुझे फ़िलहाल कमर की हलकी दर्द है और थोड़ा ब्लड कम है, और कोई समस्या नहीं है, फिर भी मुझे इलाज करना जरुरी है ? इस बीमारी में लोगों को और क्या समस्या हो सकती है सुरुवात में ? मैं यह जानना चाहता हूँ की आपके पास इस बीमारी के मरीज कुछ और प्रकार की समस्या ले की भी आते हैं क्या ?

हाँ इस कैंसर में लोग २-३ प्रकार की गंभीर समस्या ले के भी आते हैं जो की मैं आपको आपकी जानकारी के लिए बताता हूँ !
१. हड्डियों का फ्रैक्चर खासतौर पे रीढ़ की हड्डियों का फ्रैक्चर जिससे मरीज पैरालिसिस के साथ भी आ सकता है जिस स्थिति में अर्जेंट रेडियोथेरेपी की जरुरत भी पड सकती है !
२. किडनी फ़ैल के साथ भी मरीज आते हैं जिसके लिए उनको सुरुवात के कुछ महीने डायलिसिस कराना भी पड सकता है !
३. गंभीर इन्फेक्शन के साथ भी मरीज आते हैं खासकर निमोनिया क्यूंकि ऐसे मरीज की रोग प्रतिरोधक छमता कम होती है !

आपको फ़िलहाल इस प्रकार की समस्या नहीं है लेकिन आपकी रिपोर्टो के हिसाब से आपका इलाज करना बहुत जरुरी है नहीं तो आगे चल के आप इन समस्याओ से ग्रसित हो सकते हैं, और उस स्थिति में इलाज करना काफी मुश्किल होगा और आपकी जान जाने का भी रिस्क ज्यादा रहेगा !

मेरा कैंसर किस स्टेज का है ?

बाकी प्रकार का कैंसर अगर ब्लड या अस्थि मज्जा में फ़ैल जाये तो उसे स्टेज 4 कहते हैं ! चुकी यह कैंसर अस्थि मज्जे का ही है इसलिए इसका कोई स्टेज नहीं होता लेकिन कितना अच्छा या फिर कितना ख़राब तरीके का है, ये कुछ जांचो के आधार पे बताया जाता है जिनमे कुछ ब्लड की हैं और कुछ बोन मेरो टेस्ट के दौरान की जाने वाली साइटोजेनेटिक्स की जाँच है।

इलाज के आपने दो प्रकार बताये, इसके बारे में थोड़ा डिटेल में बताइये ?

१. केवल कीमोथेरेपी : इसमें मरीजों को आमतौर पे 8 -12 महीने के लिए 3 कीमोथेरेपी (इनमे एक साप्ताहिक चमड़ी में दी जाने वाली इंजेक्शन और दो खाने वाली गोली होती है- दवाई देते समय आपको समझाया जायेगा) की दवाई दी जाती है और उसके बाद इनमे से किसी एक दवाई को लगभग 2 साल के लिए दी जाति है और समय समय पे (4 महीने पे) मायलोमा की जाँच की जाती है ! इसके अलावा कुछ इन्फेक्शन से बचने वाली भी दवाइयां और हड्डियों को मजबूत करने वाली दवाइयां भी चलती है !

२. जिन मरीजों का ट्रांसप्लांट करने का प्लान होता है उन मरीजों को आमतौर पे 4-6 महीने के लिए 3 कीमोथेरेपी (इनमे एक साप्ताहिक चमड़ी में दी जाने वाली इंजेक्शन और दो खाने वाली गोली होती है- दवाई देते समय आपको समझाया जायेगा) की दवाई दी जाती है और उसके बाद (4 महीने पे) मायलोमा की जाँच की जाती है और उपयुक्त होने पे 4-6 महीने पे ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। कभी कभी बीमारी के गंभीर होने की स्थिति में ट्रांसप्लांट के बाद बी एक साल तक कोई एक कीमोथेरेपी की दवाई देनी पद सकती है। इसके अलावा कुछ इन्फेक्शन से बचने वाली भी दवाइयां और हड्डियों को मजबूत करने वाली दवाइयां भी चलती है !

कीमोथेरेपी के अलावा कौन से दवाईयां चलती है ?

1 . इन्फेक्शन से बचाओ के लिए दवाइयां – चुकी इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक छमता ) इस बीमारी और इसमें चलने वाली दवाइयों से भी कमजोर होता है, इसीलिए 2-3 दवाई चलती है जैसे ऐसीवीर, सेपट्रान इत्यादि।
2 . हड्डियों को मजबूत करने के लिए कैल्शियम एंड विटामिन बी सप्लीमेंट्स के अलावा मासिक इंजेक्शन भी दी जाती है जैसे की ज़ोलेनड्रोनेट। (इलाज के सुरुवाती समय में आपके डॉक्टर द्वारा कैल्शियम न चलाने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
3 . हीमोग्लोबिन को बढ़ने के लिए चमड़ी में लगने वाला एक एरीथ्रोपोइटिन (या उस तरह का ) इंजेक्शन भी दिया जाता है.
4 . कैंसर/लेनलीडोमिड (केमो)/एरीथ्रोपोइटिन की वजह से खून के थक्के जमने की समस्या हो सकती है इसलिए आमतौर पे इकोस्पीरिन भी चलायी जाता है।
(आपकी जरूरतों और बीमारी की स्थिति के हिसाब से ये चारों दवाईओं को चलिए जाती है। )

मायलोमा की दवाईयों के बारे में जानकारी देने वाला लेख भी लिखा है मैंने इस वेबसाइट पे जिसमे दवाइयों को देने की विधि और साइड इफेक्ट्स के बारे में बताया गया है।

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