एनीमिया क्या है और एनीमिया की समस्या।

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एनीमिया में शरीर में खून की कमी या फिर वैज्ञानिक भाषा में कह लें तो हीमोग्लोबिन कम हो जाता है. हीमोग्लोबिन लोहे से भरपूर प्रोटीन होता है जो आपके फेफड़ों से ऑक्सीजन को आपके शरीर के ऊतकों तक पहुंचाता है। हीमोग्लोबिन की कमी से ऑक्सीजन का प्रवाह शरीर के ऊतकों खासकर नसों में भी कम होता है जिससे एनीमिया की वजह से होने वाली दिक्कतें होने लगती है।

महिलाओं में हीमोग्लोबिन का 12 से कम होने और पुरुषों में 13 से कम होने को ही एनीमिया कहते हैं।

एनीमिया के लक्षण

हर समय थकान महसूस होना -उठने-बैठने पर चक्कर आना !
त्वचा और आंखों में पीलापन – खासकर नाखूनों, हथेली और तलवों में पीलापन !
दिल की असामान्य धड़कन – नारी या दिल की धड़कन का तेज चलना !
सांस लेने मे तकलीफ – किसी काम को करते हुए जल्दी साँस फूलना जैसे सीढ़ी चढ़ना !
मानसिक तौर पे सुस्त महसूस करना और चिड़चिड़ापन का होना !

एनीमिया के कारण

हलाकि एनीमिया के अनेक कारण हो सकते हैं पर हमारे भोजन में लोहा, फॉलिक ऍसिड,विटामिन बी-12 की कमी इसका सबसे प्रमुख कारन है। बच्चो में एक कारन पेट में कीड़े का होना होता है और महिलाओं में माहवारी में रक्तस्त्राव का अधिक होना, बारबार प्रसव होना भी एक प्रमिख कारन है। यही कारन है की बच्चो और महिलाओ में ये समस्या पुरुषो के मुकाबले ज्यादा होती है। लगभग 60-70 % महिलाओं को एनिमिया की बीमारी होती है।

नोट 1 :बी-12 शाकाहारी आहार में नही होता और इसलिये शाकाहारी लोगों में इसकी कमी अक्सर हो जाती है खासकर बुजुर्गों में इसलिए शाकाहारी लोगों को दूध सही मात्रा में लेनी चाहिए। विटामिन बी-12 के लिये मांस, अंडे, दूध आदि पदार्थ सबसे अच्छे है।
नोट 2 : जिन एनीमिया के मरीजों में लोहे की कमी वाले लक्षण हो उनमे अगर दवाईयों के बाद भी एनीमिया ठीक नहीं होता उनमे थैलासीमिया ट्रेट (आधी थैलासीमिया) होने की समभावना भी होती है जो की आनुवंशिक बीमारी है।
नोट 3 : यदि आप अपने ब्रश में अधिक बाल देखते हैं या आपके बाल पतले होते हैं, तो हो सकता है कि आप एनीमिक हों। यह विटामिन की कमी या हाइपोथायरायडिज्म जैसी हार्मोनल स्थिति भी हो सकती है, इसलिए इसे अपने डॉक्टर के पास जाएं।
नोट 4 :यदि आप किसी लम्बी बीमारी के शिकार हैं जैसे टी.बी, किडनी फेलियर, कैंसर, बवासीर तो भी आपको एनीमिया हो सकता है।

एनीमिया के लक्षण होने पे आपको तुरंत आपके डॉक्टर को दिखाना चाहिए और उनसे परामर्श लेना चाहिए। क्यूंकि कभी कभी एनीमिया के पीछे कोई गंभी कारन भी हो सकता है जो की साधारण जांचो से स्पष्ट हो जाता है और उसका सटीक इलाज करना संभव होता है।

 

एनीमिया हो इसके लिए किन बातों का धयान रखना चाहिए ?

इससे बचाव के लिए आहार में कुछ बदलाव करना काफी फायदेमंद साबित होता है।
शरीर में आयरन की जरूरत को पूरा करने के लिए खाने में दाल, रागी, चकुंदर, गाजर, ट्माटर और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें।
जब भी घर पर सब्जी बनाएं, तो उसे लोहे की कढ़ाई में बनाएं. इससे खाने में आयरन की मात्रा काफी बढ़ जाती है।
खाने में गुड चने का इस्तेमाल करें-इनमे आयरन प्रचुर मात्रा में होती है।
भोजन में नींबू के प्रयोग से आयरन अच्छे से हजम होते है। इसके विपरित आहार में चाय होने से आयरन कम हजम होते है।
आयरन की कमी गंभीर मात्रा में हो गई है, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर आप आयरन टेबलेट भी ले सकते हैं।
शाकाहारी लोगों को दूध सही मात्रा में लेनी चाहिए, और कुछ अंतराल पे एक-दो महीनो के लिए मल्टी विटामिन की गोलियां भी ले सकते हैं।
बच्चों को हर 6 महीने पे कृमि की दवाई देनी चाहिए खासतौर पे ग्रामीण इलाकों में रहने वालों बच्चे।
गर्भवती, स्तनदा महिलाओं में आयरन की कमी आमतौर रहती है – इनको आयरन की गोली डाक्टरी सलाह पे जरूर लेनी चाहिए।

यदि आयरन विटामिन के द्वारा इलाज के बावजूद एनीमिया में सुधर नहीं हो रहा है तुरंत हेमोटोलॉजिस्ट की राय लेनी चाहिए, क्यूंकि ऐसी स्थिति में कुछ गंभीर बीमारियां भी हो सकती है जिसका अगर सही समय पे पता चल गया तो इलाज संभव है।

उदाहरण के तौर पे एनीमिया के बुजुर्ग मरीज मायलोमा जैसे ब्लड कैंसर के शिकार भी हो सकते हैं खासतोर पे जिनको एनीमिया के साथ साथ हड्डियों का भी दर्द रहता है। दूसरे उदाहरण के तौर पे ऐसी महिलाएं/पुरुष जिनका हीमोग्लोबिन 10 -12 के बिच हो और आयरन और विटामिन की गोली लेने के बाद भी उतना ही रह जाये तो उनमे थैलासीमिया ट्रेट (आधी थैलासीमिया) होने की समभावना भी होती है जो की आनुवंशिक बीमारी है और इसका काउंसलिंग करना महत्तवपूर्ण होता है।

नोट : इस लेख में प्रयोग किये चित्रों को महिला और बाल विकास मंत्रालय के वेबसाइट से लिया गया है