इओसिनोफिलिया: लक्षण और कारण

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रक्त में बह रहे हर तरह के रक्त कण का अपना-अपना अलग काम है।  लाल रक्त कणों (RBC) में हीमोग्लोबिन होता है।  ये लाल रक्त कण ही हमारे फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर पूरे शरीर में हर अंग-प्रत्यंग तक पहुंचाने का काम करते हैं।  वहीं श्वेत रक्त कण हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक फौज है।  बैक्टीरिया, वायरस आदि हमारे शरीर में प्रवेश करके हरदम रोग पैदा करने की कोशिश करते हैं परन्तु ये श्वेत रक्त कण उनसे लड़कर उन्हें नष्ट कर देते हैं।  हमारे शरीर की इस रोग प्रतिरोधक क्षमता के सिस्टम में इन सेल्स का बड़ा महत्वपूर्ण हाथ है।

इस्नोफिल सफेद रक्त कोशिकाओं (ल्यूकोसाइट) का एक प्रकार है, जो मूलतः पैरासाइट्स से लड़ने का काम करते हैं। हमारे पेट या शरीर में कहीं भी इन कीड़ों को पनपने से रोकने का काम इनका है.

इस्नोफिलिया क्या है?

इस्नोफिल सफेद रक्त कोशिकाओं (ल्यूकोसाइट) का एक प्रकार है, जो अस्थिमज्जा में बनता है।  आपके रक्त में इओसिनोफिल्स की एक निश्चित मात्रा होती है।  जब तक यह निर्धारित मात्रा में रहती है, तब तक बीमारी नहीं मानी जाती, लेकिन जब इसकी मात्रा शरीर में अधिक हो जाती है, तो यह बीमारी बन जाती है। हजारों इस्नोफिल्स विभिन्न अंगों में जाकर जमा हो जाते हैं और उन अंगों को धीरे-धीरे नष्ट करने लगते हैं।

ईओसिनोफिल्स की नॉर्मल मात्रा क्या होती है?

रक्त कणों में जीरो से लेकर सात प्रतिशत तक ईओसिनोफिल्स नॉर्मल माने जाते हैं। इनका एक एब्सॉल्यूट काउंट भी किया जाता है जो पांच सौ तक नार्मल होता है। इसके ऊपर हम ईओसिनोफिलिया कहेंगे।

ईओसिनोफिल्स बढ़ने के क्या कारण होते हैं?

इसके बहुत से कारण हो सकते हैं।

  1. कोई एलर्जी जैसी बीमारी हो – अस्थमा, एक्जिमा, एलर्जिक रायनाइटिस आदि
  2. पेट या शरीर में कहीं कीट (कीड़े) हो गए हैं
  3. फाइलेरिया – श्लीपद या फीलपाँव या ‘हाथीपाँव’ के रोगी के पाँव फूलकर हाथी के पाँव के समान मोटे हो जाते हैं।
  4. गठिया या अन्य कोई कोलेजन (रयूमेटिक) बीमारी है
  5. ऐसी दवाएं ले रहे हों जो ईओसिनोफिल्स काउंट बढ़ा देती हैं – जैसे सल्फोनामाइड्स, पेनिसिलीन्स, नाइट्रोफ्यूरेंटिन, सिप्रोफ्लोक्सिलीन

इन स्थितियों में ईओसिनोफिलिया अलग से कोई बीमारी नहीं है – ये ऊपर दिए गए स्थितियों के कारण होता है। कारण को समझना होगा और उसके इलाज की जरूरत होगी। अस्थमा है तो उसका इलाज लें।  कोई दवा ले रहे हैं तो उसे जब भी बंद करेंगे ईओसिनोफिलिया भी ठीक हो जाएगा। अगर फ़ायारिया है तो इसे दवाओं से दूर किया जा सकता है।

इन स्थितियां में फालतू ही ईयोसिनोफिल्स की रिपोर्ट को लेकर घबराने की कोई जरुरत नहीं है।

कोई ऐसी स्थिति जिसमे इस्नोफिलिया को लेकर चिंतित होना चाहिए ?

कुछ स्थितियों में ईओसिनोफिलिया की मात्रा बहुत ही अधिक जाती है (एब्सोल्यूट काउंट में 1.5 हजार से लेकर एक लाख तक) तब यह स्वयं में एक गंभीर बीमारी भी हो सकती है।  यह किसी ब्लड कैंसर का भी लक्षण भी हो सकता है।

इन बीमारियों में, ये हजारों ईयोसिनोफिल्स जाकर विभिन्न अंगों में जमा हो जाते हैं।  फिर ये वहां उन अंगों को धीरे-धीरे नष्ट करने लगते हैं।

पर इस्नोफिलिया के ये गंभीर कारन बोहोत कम केसेस (पेशेंट्स) में ही होते है। इसलिए घबड़ाने की जरुरत नहीं है। बस सही समय पर डॉक्टर की राय लेने की जरुरत है।

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